गुरु पर्व विशेष पर यहाँ गुरु नानक देव जी के वे अनमोल सीख जो हर किसी को जानना चाहिए, पर सारगर्भित लेख प्रस्तुत किया गया है। उनके द्वारा दी गयी सीख इतनी पवित्र एवं सुगम है कि आज के समय में भी सभी धर्म के लोग इनकी ओर खींचे चले आते हैं एवं अपने जीवन शैली को सुधार रहें हैं।
आधुनिक दौर में गुरु नानक देव जी के शिक्षाओं पर गौर क्यों करना चाहिए?
जैसे कि हम जानते हैं कि गुरु नानक देव जी सिख धर्म के संस्थापक एवं उनके आदि (प्रथम) गुरु है। गुरु नानक देव जी जन्मतिथि गुरु नानक जयंती अर्थात प्रकाश पर्व या गुरु पर्व हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन पूरे विश्व में आदर एवं सम्मान के साथ मनाया जाता है। गुरु नानक जयंती का अर्थ गुरु नानक जी के जन्म तिथि से है। इनका जन्म वर्ष 1469 में तलवंडी गाँव आर्थत ननकाना साहिब (वर्तमान में यह पाकिस्तान में स्थित है) में हुआ था।
यहाँ गुरु नानक जी रचनाओं का जिक्र करना जरूरी है क्योंकि उनकी अनमोल सीख का सार उन्हीं रचनाओं से लिया जाता है। गुरु नानक जी रचनाओं को ‘आदि ग्रंथ’ में संकलित की गयी है। उनकी प्रमुख रचनाओं में आसा दी वार, जपु, आरती, बराहमाहा एवं ओंकार महत्वपूर्ण है।
आज जब पूरा विश्व आपसी वैमनष्य, आडंबरों, भेदभाव और अंधविश्वासों से जूझ रहा है। लोग मानसिक तनाव से ग्रसित प्रतीत हो रहा है एवं सभी एक दूसरे आगे निकलने की होड़ में मनुष्यत्व का गला घोट चूंके है। परिणाम स्वरूप ऐसे लोगों मानसिक एवं शारीरिक समस्याएँ से पीड़ित एवं ग्रसित हो चुके हैं। ऐसे में गुरु पर्व पर हमें गुरु नानक देव जी के उन अनमोल शिक्षाओं के बारे में अवश्य जानना चाहिए जो हमें सामाजिक बुराइयों से मुक्ति दिला सकें एवं हमें आंतरिक सुख की प्राप्ति हो सकें।

पहली सीख : काम, क्रोध, मोह, लालच एवं अहंकार से दूर बनाए रखना
गुरु नानक देव जी ने मनुष्य को पाँच बुराइयों अर्थात काम, क्रोध, मोह, लालच एवं अहंकार से दूर रहने को कहा है। मनुष्य जब तन इन आंतरिक बुराइयों पर विजय प्राप्त नहीं करता तब तक उसे मानसिक सुख प्राप्त नहीं हो सकता। गुरु नानक जी के अनुसार सांसरिक बुराइयों से अपने आप को बचाने का उपाय है – विनम्रता एवं मधुर वाणी का चयन।
हमें समाज के समक्ष विनम्रता का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए एवं आपसी वार्ता करते समय एसी वाणी का प्रयोग करना चाहिए जिसे दूसरों का कष्ट न हो बल्कि सामने वालों को प्रिय लगे। विनम्रता एवं मधुर वाणी के अभ्यास से हम जीवन में आश्चर्यजनक परिणाम ला सकते हैं।
दूसरी सीख – ईमानदारी से कर्म करते रहना
गुरु नानक देव जी मनुष्य के कर्म में निहित सच्चाई एवं ईमानदारी को विशेष प्रधानता दी है। जीवन कर्म प्रधान होना चाहिए। इसमें ईर्ष्या, छल-कपट, रिश्वत एवं बेईमानी की कोई जगह नहीं है। अगर हम इन अवगुणों से दूर रहकर सच्चाई एवं ईमानदारी से कार्य करेंगे तो हमें समाज में किसी भी तरह से किसी दुविधा, डर आदि के बिना अपना जीवन सुख से गुजार सकेंगे।
तीसरी सीख-‘सरबत दा भला‘
गुरु नानक देव जी की एक महत्वपूर्ण सीख है—’सरबत दा भला’ अर्थात जाति, धर्म, भाषा, लिंग आदि का भेदभाव किए बिना संपूर्ण मानव जाति और जीव मात्र के लिए कल्याण की भावना रखना। यहाँ ‘स्व’ नहीं ‘विश्व’ कल्याण की भावना छिपी है। परहित सेवा से ही आत्मा की शांति प्राप्त होती है एवं व्यक्ति को ईश्वर सानिध्य प्राप्त होता है। जब हम समाज की सेवा निस्वार्थ भाव से सेवा करते है तो हमारा मन प्रफुल्लित हो जाता है एवं हमारे अन्तःमन में सकरात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है।
चौथी सीख – महिलाओं को सम्मान एवं सशक्तिकरण
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के हाल के ही रिपोर्ट के अनुसार हाल के वर्षों में महिलाओं पर अत्याचार के 445256 मामले दराज हुए हैं एवं प्रत्येक घंटे 51 एफआईआर दर्ज हो रहे है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व महिला जनसंख्या का 31.6% लगभग 840 मिलियन महिलाएं शारीरिक एवं लैंगिक हिंसा से पीड़ित है। ऐसे में हम कल्पना कर सकते हैं कि इस सभ्य समाज में भारत सहित वैश्विक समाज में महिलाओं की वास्तविक स्थिति क्या है।
गुरु नानक देव जी के सीख का एक महत्वपूर्ण भाग है–महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबरी का अधिकार, सम्मान और सुरक्षा प्रदान करना। इसके लिए व्यक्ति विशेष को शिक्षित करना आवश्यक है। गुरु नानक देव जी महिलाओं के प्रति समाज की मानसिकता पर करारा चोट किया है एवं महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता पर पूरा ज़ोर दिया-
“सो किउ मंदा आखीऐ जितु जंमहि राजान“ (उस स्त्री को नीचा या बुरा क्यों कहें, जो राजाओं, शूरवीरों और संतों को जन्म देती है?)
पाँचवी सीख -एकेश्वरवाद की अवधारणा
गुरु नानक जी ने “इक ओंकार सतनाम” अर्थात एकेश्वरवाद को मानते थे। उनका कहना था कि ईश्वर एक ही है। ईश्वर ने यह सारी सृष्टि सृजित की है एवं सभी मनुष्य सहित सभी जीव ईश्वर का अंश है। अतः सभी मनुष्यों में ईश्वर का वास है एवं इसीलिए प्रत्येक मनुष्य के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि सभी के प्रति सम्मान एवं प्रेमभाव रखे। ऐसा करने पर हम ईर्ष्या, द्वेष आपसी कलह जैसे दुर्गुणों से मुक्त हो सकेंगे एवं अपनी सारी ऊर्जा सफलता एवं लक्ष्य की प्राप्ति पर केन्द्रित कर सकेंगे।
छठवीं सीख – वंड छको
वंड छको का अर्थ है – परहित सेवा एवं गरीब एवं जरूरतमंदों को अपनी मेहनत और कमाई का कुछ हिस्सा दान करना। नानक जी शिक्षाओं में से एक महत्वपूर्ण हिस्सा है- जरूरतमंदों को दान करना, चाहे वह भोजन हो, धन हो, समय हो या ज्ञान। दैनिक जीवन में सीख हमें यह सीख लेनी चाहिए कि हमें भी अपने जीवन में चाहे भोजन हो, धन हो, समय हो या ज्ञान हो, जरूरतमंदों के साथ साझा करना चाहिए। हमें समाज कल्याण की भावना को बढ़ावा देना चाहिए।
इस दिशा में सिख धर्म में ‘गुरु का लंगर’ विशेष रूप चर्चा योग्य है, जहां अमीर और गरीब एक ही पंक्ति में बैठकर निःशुल्क भोजन करते हैं। पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित सिखों का सबसे पवित्र और प्रमुख तीर्थ स्थल – अमृतसर स्वर्ण मंदिर में दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त सामुदायिक रसोईघर (लंगर) चलाया जाता है, जहाँ प्रतिदिन जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव के बिना लाखों श्रद्धालुओं को भोजन कराया जाता है।

नाम जपो (ईश्वर का स्मरण करो)
नाम जपो का अर्थ ईश्वर की पूजा-आराधना से है। नाम जपने से मन शांत रहता है, अहंकार मिटता है और बुरे विचारों पर नियंत्रण पाना आसान हो जाता है। आज की डिजिटल जिंदगी में मानसिक भटकाव और तनाव स्वाभाविक हो गया है। गुरु नानक देव जी ने सिखाया कि अपने कर्म करते हुए भी मन में निरंतर उस परमात्मा का नाम याद रखें।
सरबत दा भला (सबका कल्याण)
यहाँ जाति धर्म भाषा लिंग का भेदभाव किए बिना सभी के लिए भक्ति मार्ग एवं सेवा मार्ग का द्वारा सभी के लिए खुला रहता है। गुरु नानक देव जी के संदेश का सार है—‘सरबत दा भला’ यानी केवल अपना या अपने परिवार का नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति और जीव मात्र के कल्याण की कामना करना।
संक्षेप में कहें तो गुरु नानक जी इन अनमोल शिक्षाओं में हमारे जीवन का सार छिपा हुआ है। अगर गौर से देखें तो इन शिक्षाओं में मनुष्य आंतरिक सद्गुणों पर ध्यान दिया गया है, हमारे व्यवहार एवं आचरण हामेन अपने जीवन के साथ-साथ दुसरों के जीवन में गहरा प्रभाव डालते हैं। इनकी द्वारा दी गयी सीख जीवन की आचार संहिता हैं। परमांतमा का ध्यान, ईमानदारी एवं सत्यनिष्ठा से कर्म करते रहना एवं परहित सेवा से जाम अपने जीवन को खुशहाल, तनावमुक्त बना सकते हैं।
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