पश्चिम बंगाल का एक बेहद ही दिलचस्प और पारिवारिक त्योहार जमाई षष्ठी है। बंगाली समुदाय में इस शुभ दिन को बेहद ही धूम-धाम, हर्षौल्लास और ढ़ेर सारे स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ मनाया जाता है।
जमाई षष्ठी का असली आकर्षण होता है मुख्य भोजन, जो पूरी तरह से पारंपरिक बंगाली शैली में तैयार किया जाता है। सबसे पहले दामाद को हल्के स्नैक्स परोसे जाते हैं, जो भूख को बढ़ाते हैं। स्टार्टर के रूप में बेगुनी (बैंगन के पकौड़े), आलू चॉप तथा मूंग दाल पकोड़ा शामिल होता है। इतना ही नहीं सास अपने दामाद के लिए बेगुन भाजा, लूची, आलूर दोम, कोशा मांगशो, इलिश भापा, शुक्तो, रसगुल्ला, मिष्टी दोई तथा विभिन्न तरह का मिठाइयाँ और फल तैयार करती है।
2026 में जमाई षष्ठी:
प्रत्येक वर्ष जमाई षष्ठी का त्योहार मई तथा जून के महीने में मनाया जाता है। साल 2026 में जमाई षष्ठी 20 जून दिन-शनिवार को मनाया जाएगा। खासकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में इसकी धूम सबसे अधिक देखने को मिलती है।
| 2026 में जमाई षष्ठी | 20 जून, दिन-शनिवार |
षष्ठी माता के आशीर्वाद से शुरू होता है जमाई षष्ठी का त्योहार:
जमाई षष्ठी त्योहार का सीधा संबंध षष्ठी माता से है। षष्ठी माता को बच्चों और परिवार की रक्षक देवी मानी जाती हैं। बंगाल में मान्यता है कि षष्ठी माता की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसलिए जमाई षष्ठी के दिन सास सबसे पहले षष्ठी माता की पूजा करती है तथा अपने दामाद की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करती है।
जानें जमाई षष्ठी पर क्यों खास होता है सास और दामाद का यह बंधन?
जमाई षष्ठी बंगाल में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक त्योहार है, जो ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन दामाद को घर बुलाया जाता है और उसकी खूब खातिरदारी की जाती है तथा दामाद को घर का “विशेष अतिथि” माना जाता है। अतिथि के रूप में सास अपने दामाद को भव्य रूप से स्वागत करती है। अपने दामाद के मस्तक पर तिलक लगाती है और साथ ही साथ आशीर्वाद के रूप में सास, अपने दामाद के कलाई पर पीला धागा बांधती है और दामाद भी अपने सास का पैर छूकर आशीर्वाद लेता है। इस तरह जमाई षष्ठी का यह त्योहार सास और दामाद के बीच एक गहरे रिश्ते को दर्शाता है तथा आज के इस आधुनिक दौर में भी जमाई षष्ठी का यह त्योहार बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
सास का प्यार और दामाद का सम्मान – यही है जमाई षष्ठी की असली पहचान।

जमाई षष्ठी की भव्य तैयारियाँ:
- जमाई षष्ठी के आते ही सास अपने दामाद की भव्य स्वागत के लिए इस दिन की तैयारियाँ पहले से ही शुरू कर देती है।
- सास अपने दामाद और बेटियों के लिए कपड़े, गहने तथा कई तरह के उपहार ख़रीदती है।
- इसके बदले जमाई भी अपने सास के लिए फल, मिठाई, वस्त्र तथा गिफ़्ट ले जाते है।
बंगाल में जमाई षष्ठी कैसे मनाई जाती है?
1. पूजा और आशीर्वाद
जमाई षष्ठी के दिन सबसे पहले षष्ठी माता की पूजा की जाती है और माता से अपने दामाद के अच्छे स्वास्थ तथा सफलता के लिए आशीर्वाद लिया जाता है।
2. दामाद का स्वागत
इस दिन दामाद को ससुराल बुलाया जाता है। सास अपने दामाद को तिलक लगाकर, आरती करके तथा कलाई पर पीला धागा बांध अपने दामाद का स्वागत करती है।
3. भव्य भोजन
जमाई षष्ठी के दिन कई स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते है और उसके बाद दामाद को बैठाकर प्यार से खाना खिलाया जाता है।
4. उपहार देना
अंत में सास अपने दामाद को कपड़े, मिठाई तथा अन्य कई तरह के उपहार देती हैं और दामाद भी अपने सास के लिए गिफ़्ट्स लेकर आते है।
जमाई षष्ठी मेनू: दामाद के लिए शाही बंगाली दावत
जमाई षष्ठी पश्चिम बंगाल का एक बेहद खास और पारंपरिक त्योहार है, जिसमें दामाद (जमाई) को भगवान के समान सम्मान दिया जाता है। इस दिन का सबसे बड़ा आकर्षण होता है स्वादिष्ट भोजन। सास अपने दामाद की पसंद का पूरा ध्यान रखते हुए तरह-तरह के व्यंजन बनाती है, ताकि उसे एक यादगार अनुभव मिल सके।
शुरुआत होती है आम की मिठास से:
जमाई षष्ठी पर भोजन की शुरुआत आमतौर पर मौसमी फलों, खासकर आम से शुरू की जाती है। आम को “फलों का राजा” कहा जाता है और यह इस त्योहार की मिठास को दर्शाता है।
जैसे: माछ– खासकर रोहू या हिलसा, मटन करी, चिंगरी मलाई करी, लूची, आलू दोम, शुक्तो, चावल और दाल, चटनी, पापड़, रसगुल्ला, संदेश, मिष्टी दोई (मीठा दही) तथा पायेश (खीर)। इन मिठाईयों के बिना यह त्योहार अधूरा माना जाता है।

जमाई षष्ठी सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि यह रिश्तों में प्यार और अपनापन बढ़ाने का अवसर है। असल जिंदगी में यह रिश्ता बहुत प्यार और सम्मान से भरा होता है। इस तरह जमाई षष्ठी का यह त्योहार सास और दामाद के बीच के रिश्ते को खास बनाता है।
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